नीतीश कुमार अभी तक चौंकाते थे, लेकिन अब उनकी रणनीति ने हैरान करना भी शुरू कर दिया है। ये साफ है कि नीतीश कुमार पर विपक्ष मानसिक स्थिति ठीक होने का जितना भी आरोप लगा ले, लेकिन नीतीश का दिमाग समझना आज भी न तो सियासी पंडितों के बस की बात है और न ही विरोधियों के साथ साथियों के भी बूते की है। नीतीश ने अपने सीएम पद से इस्तीफे के बाद नेताओं को आगे कर ऐसा दांव चला, जिससे बीजेपी माने या न माने, लेकिन उसके लिए परेशानी खड़ी हो गई है।
श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बना कुर्मी वोटरों को भी साध लिया
- नीतीश के तीसरे सियासी योद्धा अब श्रवण कुमार बन गए हैं। नीतीश कुमार ने उन्हें बिहार विधानसभा में जदयू विधायक दल का नेता बना दिया है। इससे पहले 20 साल में ये पहली बार था कि किसी कुर्मी नेता ने मंत्री पद की शपथ नहीं ली। नीतीश कुमार ने लालू यादव के खिलाफ 90 से 2000 के दशक में कुर्मी चेतना रैली से ही अपनी राजनीति की आधारशिला रखी थी। ऐसे में कुर्मी जाति की नाराजगी का अहसास उन्हें हो चुका था। लिहाजा नीतीश ने अपने तीसरे दांव से पार्टी के अंदर कुर्मी नेताओं और नाराज कुर्मी कार्यकर्ताओं को एक झटके में गर्म मौसम में कूल संदेश दे दिया, कि वो अभी भी उनकी पसंद हैं। लव-कुश की जोड़ी साध नीतीश ने साबित भी किया कि वो अपने आधार वोटरों को भूलते नहीं हैं।
- नीतीश के खड़ा कर दिया अपने आस पास योद्धाओं की फौज
- विजय कुमार चौधरी के जरिए भूमिहार वोटरों को किया खुश
- बिजेंद्र प्रसाद यादव के जरिए मैसेज- ये जाति जदयू की दुश्मन नहीं
- श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता
